उत्तराखंड में भू-कानून का उल्लंघन करने वाले अब बच नहीं सकेंगे, कड़े भू-कानून के लिए बनाई जा रही है नियमावली और नया भू-पोर्टल
जिलाधिकारी हर महीने उपजिलाधिकारी से रिपोर्ट लेंगे, जबकि प्रत्येक तिमाही अपनी रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजेंगे। नियमावली को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। प्रदेश सरकार ने जनभावना को केंद्र में रखकर कड़ा भू-कानून बनाया है।
पहले से चली आ रही व्यवस्था से छेड़छाड़ नहीं
भू-कानून का उल्लंघन होने पर संबंधित स्थल या भूमि के फोटो के साथ अपडेट सूचना पोर्टल में दर्ज की जा सकेगी। समस्त पटवारी और लेखपाल आनलाइन इससे जुड़ेंगे।
अब तक हुए संशोधनों के लिए भी नियमावलियां
नए कानून को पूरे प्रदेश में इस प्रकार प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि भू-कानून का उल्लंघन करने वाले तुरंत पकड़ में आ सकें। राजस्व विभाग नए कानून की नियमावली बनाने में जुटा है। औद्योगिक एवं निवेश के प्रयोजन के लिए भूमि खरीद की अनुमति के लिए अनिवार्यता प्रमाणपत्र, शपथपत्र, आवेदन करने समेत कानून के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्त प्रक्रिया का विवरण नियमावली में होगा।इसके स्वरूप सरल रहेगा, ताकि आवेदक को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भू-कानून में अब तक जितने संशोधन किए गए हैं, उनसे जुड़ी नियमावलियां भी इसका हिस्सा होंगी।
भूमि खरीद व भू-उपयोग परिवर्तन की समयबद्ध प्रक्रिया
नियमावली में उद्योगों की ओर से भूमि खरीदने के बाद वहां 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार देने से संबंधित सूचनाएं देने की व्यवस्था बनाई जा रही है। साथ ही भूमि खरीद और भू-उपयोग परिवर्तन की अनुमति की व्यवस्था समयबद्ध की जाएगी।
