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जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक, जब देश के प्रधानमंत्रियों ने पेश किया बजट

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को मोदी 3.0 का दूसरा पूर्ण बजट पेश करेंगी। यह बजट सरकार की आर्थिक नीतियों और देश की आर्थिक दिशा को काफी हद तक स्पष्ट करेगा। अगर बजट की बात करें, तो इसने देश की आर्थिक दिशा और दशा को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। इसने कई ऐतिहासिक पल भी देखे हैं। जैसे कि बजट को ऐसे लोगों ने भी पेश किया है, जो उस वक्त प्रधानमंत्री थे या फिर बाद में प्रधानमंत्री बने। आइए ऐसी शख्सियतों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

जवाहरलाल नेहरू

जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए 1958 में केंद्रीय बजट पेश किया। इसकी वजह भी काफी दिलचस्प थी। दरअसल, उस वक्त वित्त मंत्री टी टी कृष्णमाचारी थे। लेकिन, बजट से ठीक पहले मुंद्रा घोटाला उजागर हुआ। उसमें कृष्णमाचारी का नाम भी शामिल था। इस घोटाले चलते वित्त मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। उनकी जगह नेहरू ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली और खुद बजट पेश किया।

मोरारजी देसाई

मोरारजी देसाई के नाम भारत में सबसे ज्यादा केंद्रीय बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। वह जनता पार्टी के साथ 1977 से 1979 तक प्रधानमंत्री रहे थे। मोरारजी देसाई ने 8 पूर्ण और 2 अंतरिम बजट समेत कुल 10 बजट पेश किए। वित्त मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 1959 से 1963 तक लगातार बजट पेश किए। साथ ही 1962 का अंतरिम बजट भी पेश किया। उन्होंने 1967 के अंतरिम बजट के साथ-साथ 1967, 1968 और 1969 के बजट भी पेश किए।

इंदिरा गांधी

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी अपने कार्यकाल के दौरान बजट पेश किया था। मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद इंदिरा गांधी ने 1969 में वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला। उन्होंने 1970 का केंद्रीय बजट पेश किया। एक साल बाद उन्होंने गृह मंत्री यशवंतराव चव्हाण को नया वित्त मंत्री नियुक्त किया।

राजीव गांधी

इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी ने भी प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए बजट पेश किया। इसकी नौबत तत्कालीन वित्त मंत्री वी पी सिंह को उनके पद से हटाने के बाद आई। राजीव गांधी ने जनवरी और जुलाई 1987 के बीच कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला था।

मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह ने 1991 से 1996 तक पी वी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री थे। उन्होंने पहली बार 1991 में बजट पेश किया, जिसे देश के इतिहास में सबसे क्रांतिकारी बजट माना जाता है। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था को रिवाइव करने के लिए उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की वकालत की गई थी। 2004 में कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए की सरकार बनने के बाद वह प्रधानमंत्री भी बने।

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