Uttarakhand

यमुनोत्री घाटी में संकट गहराया: 12वें दिन भी बंद है हाईवे, बिजली और नेटवर्क सेवाएं ठप

भारी बारिश से सड़कें बंद, संचार बाधित, हेली सेवा से राहत सामग्री भेजने की तैयारी

उत्तरकाशी : लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने यमुनोत्री घाटी में हालात को और जटिल बना दिया है। यमुनोत्री हाईवे पिछले 12 दिनों से पूरी तरह ठप है। जगह-जगह भूस्खलन, मलबा और पत्थर आने से आवागमन असंभव हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई स्थानों पर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है।

बिजली और नेटवर्क सेवा ठप, जनजीवन बेहाल

यमुनोत्री धाम और उसके आसपास के कई गांवों और कस्बों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हैं। इस आपदा के बीच स्थानीय लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे संकट और गहरा गया है। स्याना चट्टी में यमुना नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि मोटर पुल के ऊपर से पानी बहने लगा। हालांकि राहत की बात यह है कि नदी का बहाव अब सामान्य हो रहा है।

हेली सेवा से राहत भेजेगा प्रशासन

प्रशासन ने मौसम अनुकूल रहने की स्थिति में हेली सेवा के जरिए यमुनोत्री क्षेत्र के खरसाली गांव में राहत सामग्री पहुंचाने की योजना बनाई है। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी पी.डी. सौंदाण ने बताया कि बिजली ठप रहने के कारण 80 लीटर डीजल भी जनरेटर के लिए भेजा जाएगा, ताकि आपात स्थिति में बिजली उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही आवश्यक राशन सामग्री भी भेजी जाएगी।

खरादी कस्बे में इमारतों में दरारें

यमुनोत्री हाईवे पर स्थित खरादी कस्बे की आवासीय इमारतों और होटलों में दरारें आने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों में भय का माहौल है और कई परिवार स्थल छोड़ने की तैयारी में हैं।

बदरीनाथ हाईवे पर भी आपदा का असर

यमुनोत्री के अलावा बदरीनाथ नेशनल हाईवे भी गौचर-कमेडा के पास भारी मलबा और पत्थर गिरने से बंद हो गया है।
जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य जारी है, लेकिन बारिश रुकने तक स्थिति सामान्य होने की संभावना कम दिख रही है।