Headline
इस दिन खुलेंगे चारधाम के पहले प्रमुख पड़ाव यमुनोत्री धाम के कपाट
इस दिन खुलेंगे चारधाम के पहले प्रमुख पड़ाव यमुनोत्री धाम के कपाट
पीएमजीएसवाई के तहत उत्तराखंड में 814 किमी सड़कों का निर्माण
पीएमजीएसवाई के तहत उत्तराखंड में 814 किमी सड़कों का निर्माण
कहीं आप भी तो नहीं कर रहे अपने खानपान में यह गलतियां, बढ़ सकता है किडनी डैमेज का खतरा 
कहीं आप भी तो नहीं कर रहे अपने खानपान में यह गलतियां, बढ़ सकता है किडनी डैमेज का खतरा 
दो बहनों में एक के साथ दुष्कर्म और दूसरी के साथ छेड़खानी के मामले में महिला आयोग सख्त
दो बहनों में एक के साथ दुष्कर्म और दूसरी के साथ छेड़खानी के मामले में महिला आयोग सख्त
शिक्षा विभाग का निजी विद्यालयों की शिकायत को टोल फ्री नम्बर जारी
शिक्षा विभाग का निजी विद्यालयों की शिकायत को टोल फ्री नम्बर जारी
बिना लाइसेंस नहीं बिकेगा कुट्टू का आटा, सील पैक में होगी बिक्री
बिना लाइसेंस नहीं बिकेगा कुट्टू का आटा, सील पैक में होगी बिक्री
धामी सरकार में पिटकुल की ऐतिहासिक उपलब्धि – सीमांत क्षेत्रों को दी रोशन भविष्य की सौगात
धामी सरकार में पिटकुल की ऐतिहासिक उपलब्धि – सीमांत क्षेत्रों को दी रोशन भविष्य की सौगात
प्रदेश की स्पोर्ट्स लिगेसी पॉलिसी जल्द लागू होगी – रेखा आर्या
प्रदेश की स्पोर्ट्स लिगेसी पॉलिसी जल्द लागू होगी – रेखा आर्या
पूर्व IPS दलीप सिंह कुँवर बने उत्तराखंड के नए सूचना आयुक्त
पूर्व IPS दलीप सिंह कुँवर बने उत्तराखंड के नए सूचना आयुक्त

बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद भी मुस्लिम महिला अपने पूर्व पति से गुजारे-भत्ते की हकदार

बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद भी मुस्लिम महिला अपने पूर्व पति से गुजारे-भत्ते की हकदार

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तलाक के बाद गुजारा भत्ते से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए कोई भी तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपने पूर्व पति से बिना किसी शर्त के भरण पोषण पाने की हकदार है। भले ही उसने दूसरी शादी ही क्यों न कर ली हो। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश पाटिल ने इस मामले में 2 जनवरी को सुनाए अपने फैसले में कहा, ‘मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम- 1986 का सार यह है कि एक तलाकशुदा महिला अपने भरण-पोषण के लिए पूर्व पति से गुजारा भत्ता लेने की हकदार है। इसमें यह मायने नहीं रखता कि उसने दूसरी शादी कर ली है।

जस्टिस पाटिल ने इसके साथ ही शख्स द्वारा अपनी पूर्व पत्नी को एकमुश्त गुजारा भत्ता देने के पिछले दो आदेशों को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि धारा 3 (1) (ए) के तहत पति और पत्नी के बीच हुआ तलाक अपने आप में पत्नी के लिए भरण-पोषण का दावा करने के लिए पर्याप्त है। ऐसा अधिकारज् तलाक के दिन ही साफ हो जाता है। बता दें कि इस जोड़े की शादी फरवरी 2005 में हुई थी और दिसंबर 2005 में एक बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद पति काम के लिए विदेश चले गए, तो जून 2007 में, पत्नी और उनकी बेटी अपने माता-पिता के साथ रहने चली गईं। इसके बाद अप्रैल 2008 में पति ने महिला को रजिस्टर्ड डाक से तलाक दे दिया।

ऐसे में महिला ने एमडब्लूपीए के तहत अपने और अपनी बेटी के भरण-पोषण के लिए आवेदन किया। अगस्त 2014 में महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए चिपलुन मजिस्ट्रेट ने उन्हें 4.3 लाख रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। फिर मई 2017 में खेड़ सेशन कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दिया। ऐसे में उस शख्स ने कोर्ट ने इस आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां जस्टिस पाटिल को बताया गया कि उसने अप्रैल 2018 में पत्नी को तलाक दिया था और अक्टूबर 2018 में महिला ने दूसरी कर ली थी। पति के वकील शाहीन कपाडिय़ा और वृषाली मेनदाद ने कहा कि वह उसे गुजारा भत्ता देने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि उसने दूसरी शादी कर ली है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि वह पुनर्विवाह होने तक ही इस राशि की हकदार थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top