देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल की महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारी जिनका नाम संतोष भंडारी है, और यह महिला जो खुद को सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भी बताती है, इनके द्वारा कुछ ऐसे शब्द बोले गए है, जो समाज में नफरत की भावना पैदा कर रहे है। महिला जिसका औदा समाज में सबसे बढ़कर माना गया है। जिसका मान- सम्मान, आचार- विचार का सभी सम्मान करते है, अगर वहीं महिला समाज में अपने भड़काऊ शब्दों से जहर घोले, तो क्या ऐसी महिला को पद में रहने का कोई हक है ?
आपको बता दें कि संतोष भंडारी जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है । इनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यह पहाड़ी लोगों (पहाड़ियों) को हथियार (खुखरी) उठाने और उत्तराखंड के प्रतिष्ठित व्यवसायी वर्ग बनियों का सिर काटने के लिए उकसाती हुई साफ तौर पर नजर आ रही है। संतोष भंडारी ने अशब्द कहकर और उनके सिर मुंडवाने की धमकी देकर जानबूझकर उनका अपमान करने के लिए जहरीले बयान भी दिए है ? साथ ही पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को बनियों द्वारा संचालित सभी व्यवसायों का बहिष्कार करने के लिए भी उकसाया है। संतोष भंडारी ने उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों के लोगों को बार-बार गाली दी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए एडवोकेट अमित तोमर ने संतोष भंडारी के खिलाफ एफ. आई. आर दर्ज करवाते हुए कहा ऐसी जहरीली सोच वाली महिला व इसके जैसे कई और जहरीले सोच वाले व्यक्ति जो उत्तराखंड के सामाजिक ताने बाने को खंडित करके पहाड़ी बनाम मैदानी का जहर घोल रहे है, ऐसे लोगों पर तत्काल कार्यवाही करते हुए इन्हें रासुका में निरुद्ध करने की कार्यवाही करें।
साथ ही उत्तराखंड क्रांति दल भी अपना दृष्टिकोण साफ करें कि इस महिला का बयान उसकी निजी राय है, या पार्टी का आधिकारिक बयान व दल इस बयान से किनारा करता है। यदि हां तो इस महिला को तत्काल दल की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त करें।
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार संतोष भंडारी जो कि समाज में नफरत का जहर घोलने का काम रही है, इनको गिरफ्तार किया जाता है या नहीं ?